झारखंड बजट 2026-27: ₹1.58 लाख करोड़ के बजट में विकास, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर बड़ा दांव

झारखंड सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹1,58,560 करोड़ का  बजट पेश किया है। यह पिछले वर्ष 2025-26 के  तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक है। पिछले वर्ष 1,45,400 करोड़ का बजट पेश किया गया था। यह बजट इस बात का संकेत देता है कि झारखंड सरकार आर्थिक गतिविधियों को गति देने, नई योजनाओं को तेज गति देना, सामाजिक विकास को प्राथमिकता देने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।

इस बजट को सिर्फ आंकड़ों का समूह नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य की दिशा तय करने वाली एक स्पष्ट उन्नत रूपरेखा के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने इसमें सामाजिक कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को मजबूती देने पर विशेष जोर दिया है।

Budget
झारखंड बजट 

बजट पेश करने के दौरान क्या कहा गया

राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बजट “समावेशी विकास” की सोच पर आधारित है, जिसमें हर वर्ग—गरीब, किसान, महिला, युवा और आदिवासी समुदाय—को ध्यान में रखा गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रहना चाहती है बल्कि उनका प्रभाव जमीन पर दिखे, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

सामाजिक कल्याण को सबसे ज्यादा प्राथमिकता

इस बजट में सबसे बड़ा हिस्सा सामाजिक सुरक्षा और कल्याण योजनाओं को दिया गया है। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को लगभग ₹22,995 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो बजट का सबसे बड़ा हिस्सा है।

इससे यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और जरूरतमंद वर्गों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है।

इन योजनाओं के तहत पोषण, मातृत्व सहायता, पेंशन योजनाएं और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यक्रमों को मजबूत किया जाएगा। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले कमजोर वर्गों तक इन योजनाओं को पहुंचाने पर विशेष ध्यान रहेगा।

शिक्षा क्षेत्र में बड़ा निवेश

शिक्षा को इस बजट में दूसरी सबसे बड़ी प्राथमिकता दी गई है। प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग को ₹16,251 करोड़ का आवंटन किया गया है, जबकि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए ₹564 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

यह निवेश इस बात का संकेत है कि सरकार शिक्षा को राज्य के दीर्घकालिक विकास का आधार मानती है। बेहतर स्कूल, प्रशिक्षित शिक्षक और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के जरिए युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने की योजना है।

सरकार का लक्ष्य केवल स्कूलों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना भी है।

100 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस: शिक्षा में बड़ा सुधार

इस बजट की सबसे चर्चित घोषणा 100 “सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस” खोलने की है। इन स्कूलों में पढ़ाई सीबीएसई के पैटर्न पर 2027-28 से शुरू होगी।

इन स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा, जहां स्मार्ट क्लास, डिजिटल लैब और उच्च गुणवत्ता की पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी।

इसके साथ ही 12 लाख छात्राओं को सेनेटरी पैड उपलब्ध कराने की योजना भी शुरू की जाएगी, जिससे किशोरियों की शिक्षा में आने वाली बाधाओं को कम किया जा सके।

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद इन स्कूलों का निरीक्षण करेगी और सीबीएसई से संबद्धता दिलाने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

यह पहल राज्य की शिक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

ग्रामीण विकास और कृषि पर ध्यान

ग्रामीण विकास विभाग को ₹12,346 करोड़ का बजट दिया गया है। इसका उद्देश्य गांवों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है।

कृषि विभाग को ₹4,884 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे किसानों को बेहतर संसाधन, सिंचाई सुविधाएं और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें आधुनिक खेती की ओर प्रोत्साहित करना है।

पेयजल और स्वच्छता पर जोर

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को ₹194 करोड़ से अधिक का बजट दिया गया है। यह राशि भले ही अन्य विभागों की तुलना में कम हो, लेकिन इसका महत्व बेहद बड़ा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पानी की उपलब्धता और बेहतर स्वच्छता व्यवस्था से स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सरकार इस क्षेत्र में दीर्घकालिक योजनाओं पर काम कर रही है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में बड़ा निवेश

इस बजट में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से ही उद्योग, व्यापार और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

एयर कनेक्टिविटी में सुधार

राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के विस्तार की घोषणा की गई है। रनवे की लंबाई 9,000 फीट से बढ़ाकर 12,000 फीट की जाएगी, जिससे बड़े विमानों की लैंडिंग संभव हो सकेगी।

इसके अलावा साहिबगंज में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिससे संथाल परगना और आदिवासी क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

सड़क और परिवहन नेटवर्क का विस्तार

सड़क और परिवहन के क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर निवेश की योजना बनाई गई है:

785 किलोमीटर सड़कों का उन्नयन

1,200 किलोमीटर सड़कों का सुदृढ़ीकरण

35 नए फ्लाईओवर और रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण

पथ निर्माण विभाग को ₹6,601 करोड़ का बजट

इन परियोजनाओं से राज्य में आवागमन आसान होगा, व्यापार को गति मिलेगी और दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार

 ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 24×7 सस्ती एयर एंबुलेंस सेवा जारी रखने का निर्णय लिया है। इससे गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा, खासकर दूरदराज के क्षेत्रों में।

यह कदम राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

 हेमंत सोरेन ने इस बजट की सराहना करते हुए कहा कि इसमें सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बजट के सकारात्मक परिणाम जल्द ही जमीन पर दिखेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार विकास को केवल शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि गांव-गांव तक पहुंचाना चाहती है।

विपक्ष का विरोध

हालांकि, इस बजट को लेकर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसे आम जनता को निराश करने वाला बजट बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट केवल घोषणाओं का पुलिंदा है और इससे वास्तविक विकास को गति नहीं मिलेगी। उनके अनुसार, सरकार ने बड़ी-बड़ी योजनाओं की घोषणा तो की है, लेकिन उनके क्रियान्वयन पर सवाल खड़े होते हैं।

क्या हैं इस बजट के मायने

झारखंड का यह बजट कई मायनों में महत्वपूर्ण है। एक ओर यह सामाजिक कल्याण और शिक्षा पर जोर देता है, वहीं दूसरी ओर इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को भी प्राथमिकता देता है।

यह बजट यह दर्शाता है कि राज्य सरकार विकास के संतुलित मॉडल पर काम करना चाहती है, जिसमें आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ सामाजिक न्याय भी सुनिश्चित किया जाए।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, झारखंड बजट 2026-27 एक संतुलित और दूरदर्शी बजट के रूप में सामने आया है। इसमें शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ठोस प्रावधान किए गए हैं।

हालांकि, किसी भी बजट की सफलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। यदि सरकार अपनी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू कर पाती है, तो यह बजट राज्य के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह बजट कागज से निकलकर जमीन पर कितनी तेजी और प्रभाव के साथ उतरता है।

यह सामग्री झारखंड बजट 2026-27 से जुड़ी सार्वजनिक जानकारी और घोषित नीतिगत बिंदुओं पर आधारित एक मौलिक (original) संपादकीय प्रस्तुति है। लेख का उद्देश्य केवल सूचना देना है, किसी भी राजनीतिक दल या पक्ष के समर्थन अथवा विरोध में प्रचार करना नहीं।

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