रांची से लापता अंश और अंशिका 12 दिन बाद रामगढ़ के अहमदनगर से सकुशल बरामद, मानव तस्करी गिरोह की आशंका
रांची/रामगढ़:
रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र से लापता हुए मासूम बच्चे अंश और अंशिका को आखिरकार 12 दिनों बाद रामगढ़ जिले के चित्रपुर प्रखंड अंतर्गत अहमदनगर से पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया है। बच्चों की बरामदगी के बाद न सिर्फ पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है, बल्कि पूरे झारखंड में यह मामला एक बार फिर बच्चा चोर और मानव तस्करी गिरोह की आशंका को हवा दे रहा है।
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| Ansh & Anshika |
छोटे से कमरे में रखे गए थे बच्चे
पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों बच्चों को अहमदनगर की एक बस्ती में स्थित टिन शेड वाले छोटे कमरे में पिछले 12 दिनों से रखा गया था। हैरानी की बात यह है कि इतने दिनों तक बच्चे वहीं रहे, जबकि मामला मीडिया, सोशल मीडिया और प्रशासन की सुर्खियों में बना हुआ था। इसके बावजूद स्थानीय लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
स्थानीय सूचना से खुला राज
जानकारी के अनुसार, कुछ स्थानीय लोगों को बच्चों पर शक हुआ। उन्होंने बच्चों की तस्वीरों का मिलान सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों से किया और इसके बाद रजरप्पा थाना को सूचना दी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मकान को घेर लिया और दोनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
दो आरोपी गिरफ्तार
इस पूरे मामले में पुलिस ने एक महिला और एक पुरुष को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि जिस मकान से बच्चे बरामद हुए, वह महिला के नाम पर किराए पर दिया गया था। प्रारंभिक पूछताछ में महिला ने दावा किया कि एक व्यक्ति, जो खुद को बिहार का निवासी बता रहा था, बच्चों को यह कहकर छोड़ गया था कि उसका घर टूट गया है और वह बेहद गरीब है।
हालांकि, यह जवाब किसी को भी संतुष्ट नहीं कर पा रहा, क्योंकि बच्चों के अपहरण की खबर हर जगह फैली हुई थी।
रामगढ़ एसपी मौके पर पहुंचे
बच्चों की बरामदगी की सूचना मिलते ही रामगढ़ एसपी अजय कुमार स्वयं मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जांच शुरू करवाई। इसके बाद बच्चों को सुरक्षा में लेकर रांची ले जाया गया, जहां उन्हें एसपी आवास में रखा गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में होगा बड़ा खुलासा
पुलिस के अनुसार, रांची में आयोजित होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह साफ किया जाएगा कि
बच्चे यहां कैसे पहुंचे
किन लोगों की भूमिका रही
क्या यह मामला मानव तस्करी गिरोह से जुड़ा है
और क्या इसके तार झारखंड के बाहर, खासकर बिहार से जुड़े हैं
पहले भी लापता हो चुके हैं बच्चे
गौरतलब है कि हाल के दिनों में रामगढ़ और धनबाद से भी बच्चों के लापता होने की घटनाएं सामने आई हैं। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि राज्य में एक संगठित बच्चा चोर गिरोह सक्रिय हो सकता है।
इनाम की घोषणा भी हुई थी
बच्चों की तलाश में पुलिस ने ₹1 लाख का इनाम घोषित किया था। वहीं, दो दिन पहले एक कथित संगठित गिरोह द्वारा भी बच्चों की सकुशल बरामदगी पर इनाम की घोषणा की गई थी, जो अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
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| Ansh & Anshika |
भीड़ और सवाल
बच्चों की बरामदगी के बाद अहमदनगर में भारी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि
इतने दिनों तक बच्चे यहीं कैसे रहे?
भीड़भाड़ वाले इलाके में किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी?
क्या यह सिर्फ किराए का मामला था या कोई बड़ा नेटवर्क?
जांच जारी
फिलहाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बच्चे पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित हैं। आरोपियों के मोबाइल फोन की CDR जांच, कॉल डिटेल्स और अन्य कड़ियों को खंगाला जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले का आधिकारिक खुलासा किया जाएगा।अंश और अंशिका सकुशल बरामद: डीजीपी तदाशा मिश्रा ने किया बड़ा खुलासा, अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह की पुष्टि
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| Police team |
रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र से लापता हुए मासूम बच्चे अंश कुमार और अंशिका कुमार को 12 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद झारखंड पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया है। बच्चों की बरामदगी के बाद पुलिस मुख्यालय, रांची में एक भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जहां डीजीपी तदाशा मिश्रा ने पूरे ऑपरेशन की जानकारी साझा की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनों बच्चे अपने माता-पिता के साथ मौजूद थे। बच्चों को सुरक्षित देखकर माहौल भावुक हो गया। 12 दिनों बाद अपने बच्चों को गोद में लेने का वह पल माता-पिता के लिए अविस्मरणीय रहा।
डीजीपी का बयान: “यह एक बेहद जटिल और अंतरराज्यीय मामला”
डीजीपी तदाशा मिश्रा ने बताया कि यह मामला साधारण अपहरण नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि—
“ह्यूमन ट्रैफिकिंग दुनिया का सबसे बड़ा संगठित अपराध है। इस केस में भी एक पूरी टीम शामिल है, सिर्फ एक या दो लोग नहीं।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की पूरी जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की जाएगी, क्योंकि इससे जुड़े अन्य लापता बच्चों को सुरक्षित बरामद करने की कार्रवाई चल रही है।
12 राज्यों में चला सर्च ऑपरेशन
डीजीपी ने बताया कि बच्चों की तलाश के लिए झारखंड पुलिस ने देश स्तर पर अभियान चलाया—
12 राज्यों में पुलिस टीमें भेजी गईं
दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, राजस्थान, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्य शामिल
50 से अधिक पुलिस अधिकारी ऑपरेशन में लगे
500 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले गए
5000 से अधिक वाहनों का सत्यापन किया गया
ऑटो, ट्रेन, बस, चारपहिया वाहनों, दीवारों और सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर लगाए गए
इनाम की राशि बढ़ाकर 4 लाख रुपये
डीजीपी ने बताया कि शुरुआत में इनाम 50 हजार रुपये घोषित किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर दोनों बच्चों के लिए 2-2 लाख रुपये, यानी कुल 4 लाख रुपये कर दिया गया।
इसका उद्देश्य यह था कि बच्चों को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे और सटीक सूचना मिल सके।
दो आरोपी हिरासत में, पूछताछ जारी
पुलिस ने इस मामले में अब तक दो लोगों को हिरासत में लिया है। उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।
डीजीपी ने कहा कि—
आरोपियों के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंक खंगाले जा रहे हैं
यह गिरोह झारखंड के बाहर भी फैला हुआ है
अन्य गिरफ्तारियां भी जल्द हो सकती हैं
मीडिया की भूमिका की सराहना
डीजीपी तदाशा मिश्रा ने मीडिया को धन्यवाद देते हुए कहा कि—
“मीडिया कवरेज की वजह से लगातार दबाव बना रहा, जिससे अपराधी बच्चों को ज्यादा दूर तक नहीं ले जा सके।”
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, आम जनता और सामाजिक संगठनों के सहयोग से यह सफलता संभव हो सकी।
भावुक पल: माता-पिता को सौंपे गए बच्चे
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में अंश और अंशिका को उनके माता-पिता को सौंप दिया गया।
यह दृश्य बेहद भावुक था—
12 दिनों की पीड़ा, डर और अनिश्चितता के बाद माता-पिता ने अपने बच्चों को सुरक्षित अपनी गोद में लिया।
जांच अभी जारी
पुलिस ने साफ किया है कि—
यह केस यहीं खत्म नहीं हुआ है
अन्य लापता बच्चों की तलाश जारी है
पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा
जांच पूरी होने के बाद विस्तृत खुलासा किया जाएगा
निष्कर्ष
अंश और अंशिका की सकुशल बरामदगी न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे झारखंड के लिए राहत और खुशी की खबर है।
हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि मानव तस्करी और बच्चा चोर गिरोह कितने संगठित और खतरनाक हो चुके हैं।



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