असम की सांस्कृतिक चेतना और बोडो गौरव का उत्सव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
असम की पावन धरती एक बार फिर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का केंद्र बनी। बोडो समाज के पारंपरिक लोकनृत्य बागुरुम्बा के भव्य आयोजन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भाग लेकर इस ऐतिहासिक क्षण को और भी गौरवपूर्ण बना दिया।
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| PM MODI |
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि असम की संस्कृति केवल एक राज्य की पहचान नहीं, बल्कि पूरे भारत के सांस्कृतिक गौरव का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें बार-बार असम आने और यहां की कला, परंपरा और जनभावनाओं को निकट से अनुभव करने का अवसर मिला है। उनकी सदैव यह इच्छा रही है कि असम की कला और संस्कृति को वह पहचान मिले, जिसकी वह वास्तव में अधिकारी है।
प्रधानमंत्री ने बागुरुम्बा नृत्य को केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि बोडो समाज की आत्मा, पहचान और गौरव का जीवंत उत्सव बताया। उन्होंने कहा कि दस हजार से अधिक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत यह सामूहिक नृत्य न केवल इतिहास रच रहा है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता की शक्ति को भी प्रदर्शित कर रहा है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी कलाकारों और आयोजकों को हृदय से बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में बोडो समाज की महान विभूतियों—ओडोफा उपेंद्रनाथ ब्रह्म, गुरुदेव कालीचरण ब्रह्म और सतीश चंद्र वसुमतारी—को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने सामाजिक सुधार, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और जनचेतना को नई दिशा दी।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार असम की संस्कृति को पूरे भारत का गौरव मानती है। इसी सोच के तहत बिहू को राष्ट्रीय पहचान दी गई, चोराईदेव के मैदाम को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराया गया और असमिया भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्रदान किया गया। इसके साथ ही बोडो भाषा को असम की सह-आधिकारिक भाषा का सम्मान मिला और बोडो भाषा में शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए अलग निदेशालय की स्थापना की गई। बाथो पूजा पर राज्य अवकाश घोषित किया जाना भी इसी सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने असम में आए परिवर्तन पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि एक समय था जब राज्य अशांति, हिंसा और अस्थिरता से जूझ रहा था, लेकिन आज वही धरती संगीत, नृत्य और संस्कृति के रंगों से सजी हुई है। जहाँ कभी कर्फ्यू का सन्नाटा था, आज वहाँ सिफुंग और ढोल की मधुर ध्वनि सुनाई देती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परिवर्तन केवल असम की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे भारत की सफलता है।
प्रधानमंत्री ने 2020 के बोडो शांति समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस समझौते ने वर्षों पुराने संघर्ष पर विराम लगाया और हजारों युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास की मुख्यधारा से जोड़ दिया। आज शांति केवल कागज़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आम जनजीवन का हिस्सा बन चुकी है और बोडोलैंड में शिक्षा, रोजगार और विकास के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि असम की शांति, विकास और गौरव के केंद्र में राज्य का युवा है। बोडो समाज के युवा आज संस्कृति के दूत बनकर देश और दुनिया में असम का नाम रोशन कर रहे हैं। सरकार द्वारा विशेष विकास पैकेज, मेडिकल कॉलेज, शिक्षण संस्थान, सड़क, रेल और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास से बोडोलैंड क्षेत्र को नई गति मिली है। असम और दिल्ली के बीच की दूरी अब केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी समाप्त हो चुकी है।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि असम की यह सांस्कृतिक चेतना भारत की विकास यात्रा को और अधिक शक्ति प्रदान करेगी। उन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए सभी को शुभकामनाएं दीं और अपने संबोधन का समापन “जय हिंद, वंदे मातरम्” के साथ किया।
भाजपा सरकार असम की हर विरासत, हर गौरव का सम्मान अपना सौभाग्य समझती है। संयोग से आज ज्योति प्रसाद अग्रवाल जी की पुण्यतिथि भी है। मैं उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।साथियों, आज जब मैं यहां आया हूं, तो मेरे मन में कितना कुछ चल रहा है। मैं यह सोचकर भावुक भी हो रहा हूं कि मेरा असम कितना आगे बढ़ रहा है। एक समय जहां आए दिन रक्तपात होता था, आज वहीं संस्कृति के अद्भुत रंग सज रहे हैं। एक समय जहां गोलियों की गूंज थी, आज वहां खाम और सिभुंग की मधुर ध्वनि है। पहले जहां कर्फ्यू का सन्नाटा होता था, आज वहां संगीत के सुर गूंज रहे हैं। पहले जहां अशांति और अस्थिरता थी, आज वहां बागुरुंबा की आकर्षक प्रस्तुतियां हो रही हैं।ऐसा भव्य आयोजन केवल असम की उपलब्धि नहीं है, यह पूरे भारत की उपलब्धि है। असम के इस बदलाव पर हर देशवासी को गर्व है।डबल इंजन सरकार का विश्वास और शांति समझौता
मुझे संतोष है कि मेरे असमिया लोगों ने, मेरे बो भाई-बहनों ने इसके लिए मुझ पर भरोसा जताया। आपने डबल इंजन सरकार को शांति और विकास की जिम्मेदारी दी, आपके आशीर्वाद से हमने उसे पूरा करके दिखाया। 2020 के बोडो शांति समझौते ने वर्षों से चले आ रहे संघर्ष पर विराम लगा दिया। इस समझौते के बाद भरोसा लौटा और हजारों युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा को अपना लिया। समझौते के बाद बोडोलैंड में शिक्षा और विकास के नए अवसर तैयार हुए। शांति केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बनी। इसमें आपके प्रयासों की सबसे बड़ी भूमिका रही।असम की शांति, असम का विकास और असम का गौरव—इन सबके केंद्र में असम का युवा है। असम के युवाओं ने शांति स्थापना के लिए जो राह चुनी है, उसे हमें उज्जवल भविष्य तक ले जाना है।बोडोलैंड का विकास
शांति समझौते के बाद हमारी सरकार बोडोलैंड के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। पुनर्वास की प्रक्रिया तेज गति से आगे बढ़ाई गई। हजारों युवाओं को करोड़ों रुपये की आर्थिक सहायता दी गई, ताकि वे नई शुरुआत कर सकें। भाजपा सरकार के प्रयासों का नतीजा आज सामने है—मेरे प्रतिभाशाली बो युवा असम के सांस्कृतिक दूत बन रहे हैं। खेल के क्षेत्र में भी बो समाज के बेटे-बेटियां नाम रोशन कर रहे हैं। वे नए विश्वास के साथ सपने देख रहे हैं, उन्हें पूरा कर रहे हैं और असम के विकास को गति दे रहे हैं।कांग्रेस की आलोचना
जब हम असम की कला, संस्कृति और पहचान का सम्मान करते हैं, तो कुछ लोगों को तकलीफ हो जाती है। असम का सम्मान किस पार्टी के लोगों को अच्छा नहीं लगता? जवाब एक ही है—कांग्रेस पार्टी। कौन सी पार्टी ने भूपेन हजारीका जी को भारत रत्न देने का विरोध किया? कांग्रेस। असम में सेमीकंडक्टर यूनिट का विरोध किसने किया? कांग्रेस की कर्नाटक सरकार के एक मंत्री ने, जो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बेटे भी हैं। आज भी जब मैं असम की संस्कृति से जुड़ी कोई चीज पहनता हूं, जैसे गमछा-गमोसा, तो कांग्रेस असम का मजाक उड़ाती है।असम और बोडो क्षेत्र दशकों तक मुख्यधारा से कटा रहा—इसकी जिम्मेदार केवल कांग्रेस है। कांग्रेस ने सियासी फायदे के लिए अस्थिरता पैदा की, असम को हिंसा की आग में धकेला। आजादी के बाद चुनौतियां थीं, लेकिन कांग्रेस ने समाधान की जगह सियासी रोटियां सेकीं। जरूरत विश्वास की थी, कांग्रेस ने विभाजन बढ़ाया। जरूरत संवाद की थी, कांग्रेस ने उपेक्षा की। बोडोलैंड के लोगों की आवाज कभी सुनी ही नहीं गई। कांग्रेस तब घुसपैठियों के लिए असम के दरवाजे खोलकर उनकी आवभगत में लगी रही। विदेशी घुसपैठिए कांग्रेस का वोटबैंक बनते थे, इसलिए लाखों बीघा जमीन पर कब्जा करते रहे। आज हिमंता जी की सरकार असम के लोगों के हक की जमीन घुसपैठियों से मुक्त करवा रही है।विकास की गति
कांग्रेस ने पूर्वोत्तर को उपेक्षा की नजर से देखा। हमारी डबल इंजन सरकार कांग्रेस के पापों को धो रही है। बोडो कछारी वेलफेयर ऑटोनॉमस काउंसिल का गठन किया। बोडोलैंड के लिए 1500 करोड़ का विशेष विकास पैकेज दिया। कोकराझार में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल शुरू हुए। तामुलपुर में मेडिकल कॉलेज का निर्माण तेज। नर्सिंग कॉलेज, पैरामेडिकल संस्थान, गोवर्धन पारबतजोर, होरीसिंघा में पॉलिटेक्निक और ट्रेनिंग संस्थान बने। बोडोलैंड के लिए अलग वेलफेयर डिपार्टमेंट और एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज स्थापित।भाजपा सरकार ने दिलों की दूरी मिटाई, असम-दिल्ली की दूरी खत्म की। हाईवे, सड़कें बन रही हैं। कोकराझार को भूटान सीमा से जोड़ने वाली बिपुरी-सरालपारा सड़क परियोजना के लिए करोड़ों रुपये दिए। कोकराझार से भूटान के फुफू तक रेल परियोजना को विशेष दर्जा दिया। इससे व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।भविष्य की गारंटी और बंगाल संदेश
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| Assam Project |
जब समाज जड़ों से जुड़ता है, संवाद मजबूत होता है, समान अवसर मिलते हैं—तब बदलाव आते हैं। असम का आत्मविश्वास भारत की ग्रोथ स्टोरी को शक्ति दे रहा है।मैं गंभीरता से कहता हूं—यह मोदी की गारंटी है: मातुआ नाम शूद्र समुदाय के शरणार्थी, जो पड़ोसी देशों में धर्म-आधारित हिंसा से भागे, उन्हें डरने की जरूरत नहीं। संविधान ने उन्हें भारत में रहने का हक दिया, CAA ने सुरक्षा। भाजपा सरकार उनकी बस्तियों में विकास तेज करेगी।बंगाल में परिवर्तन लाने की जिम्मेदारी युवाओं और माताओं-बहनों पर। TMC के राज में बेटियां असुरक्षित हैं। आपका एक वोट सब बदल देगा। TMC की गुंडागर्दी का अंत होगा। वंदे मातरम की स्पिरिट जगाएं!समापन
आप सभी चित्रों के लिए धन्यवाद। SPG वाले इकट्ठा करें, मैं धन्यवाद पत्र भेजूंगा। भारत माता की जय! जय मां!असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य जी, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा जी, केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल जी, पवित्रा मार्गेरिटा जी, विधानसभा अध्यक्ष बिश्वजीत दैमारी जी, PTCEM हगरामा मोहिलारी जी—सभी को नमस्कार। माघ बिहू की शुभकामनाएं।मेरा सौभाग्य है कि मुझे असम की बो परंपराओं को करीब से देखने का अवसर मिला। प्रधानमंत्री के तौर पर मैं सबसे ज्यादा असम आया हूं। बागुरुंबा बोडो पहचान का जीवंत उत्सव है। सभी कलाकारों को शुभकामनाएं। बोडो विभूतियों—उपेंद्रनाथ ब्रह्मा, कालीचरण ब्रह्मा आदि को नमन।भाजपा असम की संस्कृति को भारत का गौरव मानती है। बोडो भाषा को आधिकारिक दर्जा, शिक्षा के लिए निदेशालय, बाथो पूजा पर छुट्टी, प्रतिमाएं स्थापित। सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।




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