भाजपा राष्ट्रीय परिषद में भावुक संबोधन:
“यह सिर्फ पद नहीं, राष्ट्रवादी आंदोलन की जिम्मेदारी है”
HindustanTajaNews:
भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में आज संगठन और राष्ट्रवाद के संकल्प से ओत-प्रोत भावनात्मक वातावरण देखने को मिला। मंच से संबोधित करते हुए नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि यह क्षण केवल एक पद ग्रहण करने का नहीं, बल्कि एक राष्ट्रवादी आंदोलन की जिम्मेदारी स्वीकार करने का है।
अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने “भारतीय जनता पार्टी जिंदाबाद” के उद्घोष के साथ की और देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सबसे पहले नमन किया। उन्होंने कहा कि एक प्रधान सेवक के रूप में प्रधानमंत्री मोदी का सेवा-भाव और नेतृत्व 140 करोड़ भारतीयों के लिए प्रेरणा है।
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| BJP party |
शीर्ष नेतृत्व को नमन
अपने भाषण में उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को विशेष रूप से स्मरण किया, जिनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा तथा केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी शामिल रहे।
उन्होंने संगठन महामंत्री बीएल संतोष सहित सभी संसदीय बोर्ड सदस्यों, मुख्यमंत्रीगण, उपमुख्यमंत्रीगण, केंद्रीय मंत्रियों और देशभर से आए प्रतिनिधियों का अभिनंदन किया।
कार्यकर्ता से अध्यक्ष तक की यात्रा
अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि एक सामान्य कार्यकर्ता को पार्टी के सर्वोच्च पद तक पहुंचाने का श्रेय भाजपा के संगठनात्मक संस्कार और शीर्ष नेतृत्व के विश्वास को जाता है। उन्होंने गुजरात के आनंद में प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुए एक कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि नेतृत्व वही बड़ा होता है, जो जनता की भावनाओं से स्वयं को जोड़ता है।
नितिन नवीन या नितिन नवीन – सही नाम क्या है?
नितिन के नाम को लेकर लोगों में अक्सर भ्रम रहता है कि उनका नाम नितिन नवीन है या नितिन नवीन।
चुनाव आयोग में दाखिल शपथ पत्र में उन्होंने अपना नाम हिंदी में “नितिन नवीन” लिखा है।
उनके हस्ताक्षर भी हिंदी में नितिन नवीन ही हैं।
वहीं, अंग्रेज़ी में हर जगह “Nitin Navin” लिखा जाता है — चाहे वह सोशल मीडिया अकाउंट हों या ई-मेल आईडी।
पिता के नाम के हिसाब से भी उनका नाम नितिन नवीन ही सही माना जाता है।
उनके पिता स्वर्गीय नवीन किशोर सिन्हा को आम बोलचाल में लोग “नवीन बाबू” कहते थे।
हालांकि, “नवीन” शब्द के अर्थ (नया) के कारण कई लोग गलती से उन्हें नितिन नवीन कह देते हैं, लेकिन प्रचलित और आधिकारिक नाम नितिन नवीन ही है।
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| Nitin Navin |
नितिन नवीन कितने पढ़े-लिखे हैं?
नितिन नवीन की शैक्षणिक योग्यता 12वीं तक है।
शुरुआती पढ़ाई बिहार के प्रतिष्ठित सेंट माइकल हाई स्कूल से हुई
1996 में उन्होंने CBSE बोर्ड से 10वीं पास की
इसके बाद दिल्ली से 1998 में 12वीं की पढ़ाई पूरी की
12वीं के बाद उन्होंने पारंपरिक स्नातक की जगह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की।
लेकिन 2005 में उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा का आकस्मिक निधन हो गया।
इसके चलते उनकी पढ़ाई और तैयारी वहीं रुक गई।
अगले ही साल पिता की सीट पर हुए उपचुनाव में नितिन नवीन विधायक बन गए, और इस तरह उनकी औपचारिक शिक्षा 12वीं तक ही सीमित रह गई।
नितिन नवीन किस जाति से आते हैं?
नितिन नवीन कायस्थ जाति से संबंध रखते हैं।
बिहार में कायस्थ जाति सवर्ण वर्ग में आती है
बिहार की जातीय जनगणना के अनुसार, इस जाति की आबादी लगभग 0.6% है
उनके पिता का उपनाम “सिन्हा” था, जो दस्तावेज़ों में परंपरागत रूप से कायस्थों से जुड़ा माना जाता है।
हालांकि बिहार में भूमिहार, कुर्मी-कोइरी और कुछ राजपूत समुदायों में भी यह उपनाम प्रयोग होने लगा है,
इसी कारण नितिन नवीन की जाति को लेकर भ्रम बना रहता है।
परिवार और वैवाहिक जीवन
नितिन नवीन, स्वर्गीय नवीन किशोर सिन्हा और मीरा सिन्हा के इकलौते पुत्र हैं।
अब उनके माता-पिता दोनों का निधन हो चुका है।
उनकी माता चाहती थीं कि बेटे की शादी कामकाजी और पढ़ी-लिखी बहू से हो, ताकि राजनीति की अनिश्चितता के बीच परिवार का भविष्य सुरक्षित रहे।
नितिन नवीन की शादी दीपमाला श्रीवास्तव से हुई
दीपमाला पहले बैंक अधिकारी थीं
फिलहाल उन्होंने नौकरी छोड़कर “नवीरा एंटरप्राइजेस” नाम से अपना स्टार्टअप शुरू किया है
नवीरा, उनकी बेटी का नाम है, जिसके नाम पर कंपनी का नाम रखा गया।
नितिन नवीन के बच्चे
नितिन नवीन का परिवार छोटा और सादा है—
एक बेटा: नैतिक
एक बेटी: नित्या नवीरा
आवास और निवास स्थान
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| Nitin Navin Family |
पहले नवीन किशोर सिन्हा पीर मुहानी–लोहानीपुर इलाके में रहते थे
विधायक बनने के बाद लंबे समय तक मिलर स्कूल के पास विधायक आवास में रहे
वर्तमान में नितिन नवीन का सरकारी आवास
हवाई अड्डा थाना क्षेत्र, टेलर रोड में स्थित है।
सेवा, संगठन और कोरोना काल
निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यकाल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के कठिन समय में जब विपक्ष घरों में सिमटा हुआ था, तब भाजपा कार्यकर्ता सेवा-भाव से मैदान में उतरे। यह प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और संगठन की शक्ति का प्रमाण था।
वैचारिक विरासत और राष्ट्रवाद
उन्होंने भाजपा की वैचारिक जड़ों को याद करते हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को नमन किया।
उन्होंने कहा कि “अंत्योदय, सुशासन और राष्ट्र प्रथम” की विचारधारा को आज प्रधानमंत्री मोदी विकसित भारत की परिकल्पना के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं।
विकास की उपलब्धियां गिनाईं
भाषण में केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने जल जीवन मिशन, 11 करोड़ शौचालय, करोड़ों पक्के मकान, आयुष्मान भारत, जनधन खाते और महिलाओं के सम्मान से जुड़ी योजनाओं को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि जनधन योजना ने यह सुनिश्चित किया कि दिल्ली से निकला एक-एक रुपया सीधे गरीब के खाते तक पहुंचे।
ऐतिहासिक फैसले और सांस्कृतिक आत्मविश्वास
राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370 की समाप्ति और कश्मीर में बदले माहौल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज लाल चौक पर तिरंगा लहराना हर राष्ट्रवादी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा केवल सत्ता की राजनीति नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या और राष्ट्रसेवा की राजनीति करती है।
युवाओं को राजनीति में आने का आह्वान
देश के युवाओं से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति से दूरी समाधान नहीं है, बल्कि सकारात्मक भागीदारी ही समाधान है। उन्होंने राजनीति को “100 मीटर की दौड़ नहीं, बल्कि मैराथन” बताते हुए धैर्य और निरंतर परिश्रम पर बल दिया।
आगामी चुनाव और संगठन का लक्ष्य
उन्होंने केरल, महाराष्ट्र, गोवा और अरुणाचल प्रदेश में मिली स्थानीय निकायों की जीत का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले महीनों में तमिलनाडु, असम, बंगाल, केरल और पुडुचेरी में होने वाले चुनावों में भाजपा मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएगी।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रत्येक कार्यकर्ता को अपने हिस्से का त्याग और पुरुषार्थ करना होगा।
वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ
वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह उद्घोष राष्ट्र की चेतना और ऊर्जा का प्रतीक है, जिसे हर जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
समापन
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे सत्ता को सेवा का माध्यम मानते हुए संगठन को और मजबूत करें और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र निर्माण की यात्रा को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।
“भारत माता की जय, वंदे मातरम्।”




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